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Navratri 2025: नवरात्रि पर मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की ऐसे करें पूजा, यहां जानिए हर स्वरूप का गुण और अर्थ

By Astro panchang | Apr 01, 2025

नवरात्रि हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-उपासना की जाती है। मां दुर्गा को शक्ति माना जाता है और शक्ति का अर्थ 'ऊर्जा' होता है। देवी दुर्गा अदृश्य ऊर्जा का मूल स्त्रोत हैं और इस सृष्टि को बनाए रखती हैं। इस शक्ति को नवदुर्गा के रूप में भी जाना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के बारे में बताने जा रहे हैं और हर रूप का अर्थ और गुण भी जानेंगे।

मां शैलपुत्री
देवी दुर्गा का पहला स्वरूप मां शैलपुत्री हैं। शैल का अर्थ शिखर से होता है। जोकि असाधारण है और ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए बढ़ रहा है। मां शैलपुत्री पहाड़ों की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती हैं और वह सूक्ष्म ऊर्जा हैं, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड उत्पन्न होता है। आध्यात्मिक रूप से जब भी हम खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, तो हमारे अंदर यह चेतना शैलपुत्री के रूप में परिलक्षित होती है।

मां ब्रह्मचारिणी
देवी दुर्गा का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है। ब्रह्म का अर्थ अनंत से होता है। आप सोचकर देखें यदि यह अनंत है, तो फिर गति का क्या मतलब है। यह हर जगह है और यहां कहां जा सकता है। ब्रह्मचारिणी का एक अर्थ अनंत के भीतर की गति है, दूसरी ऊर्जा शु्द्ध और अछूता पहलू है। यह सूर्य की किरणों की तरह प्राचीन फिर हमेशा ताजा और नया। यह नयापन दुर्गा के दूसरे रूप में समाहित है।

मां चंद्रघंटा
चंद्र का अर्थ होता है चांद या फिर मन से संबंधित। जो मन को मोहित कर ले। चंद्रमा सुंदरता की प्रतिमूर्ति है। जहां भी कोई चीज आपको सुंदर लगती है, वह देवी मां की ऊर्जा की वजह होती है। अगर ऊर्जा नहीं है, तो कुछ भी सुंदर नहीं लगता है। फिर चाहे चेहरा कितना सुंदर क्यों न हो और अगर उसमें जान नहीं है, तो उसको सुंदर नहीं कहा जा सकता है। जैसे कि हम मृत शरीर में सुंदरता नहीं देखते हैं, क्योंकि उसमे किसी तरह की ऊर्जा नहीं होती है। प्राणी मात्र में यह ऊर्जा ही सुंदरता लाती है।

मां कुष्मांडा
मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मां कूष्मांडा है। यह प्राण ऊर्जा है, वह चेतना जो सबसे छोटे जगत से लेकर विशाल ब्रह्मांड तक फैली हुई है। यह निराकार है। इसके बाद भी यह सभी कल्पनीय रूपों को जन्म देती है। जब भी हम ऊर्जा या प्राण के पुंज का अनुभव करते हैं, तो यह देवी मां का एक पहलू है।

मां स्कंदमाता
देवी दुर्गा का पाँचवां स्वरूप स्कंदमाता है। यह पूरे ब्रह्मांड की रक्षा की प्रतीक मानी जाती है। जो हमारी चेतना में वास करती हैं और सभी ज्ञान की प्रणालियों की जननी भी हैं।

मां कात्यायनी
मां दुर्गा का छठा स्वरूप मां कात्यायनी है। यह चेतना के पहलू से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती हैं। जब हम यह समझ जाते हैं, 'मैं न तो शरीर हूं और न ही मन हूं' और अपने भीतर की गहराई में उतरते हैं। तो आप हर चीज के द्रष्टा बन जाते हैं। कात्यायनी का सार है, 'इंद्रियों से परे देखना' और 'तर्क से परे जानना' है।

मां कालरात्रि
मां दुर्गा का सातवां स्वरूप मां कालरात्रि हैं। जोकि गहरी, अंधकारमय ऊर्जा का प्रतीक हैं। एक ऐसा अंधकारमय पदार्थ जो अनंत ब्रह्मांडों को धारण कर सकता है। जब हम खुश या सहज महसूस करते हैं, तो यह मां कालरात्रि का आशीर्वाद होता है। कालरात्रि देवी मां का वह स्वरूप है, जो ब्रह्मांड से परे मौजूद है। यह हर आत्मा और दिल को आराम देता है।

मां महागौरी
देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप मां महागौरी हैं। यह अनुग्रह, शक्ति और सुंदरता का प्रतीक है। जो आपको मुक्ति और परम स्वतंत्रता का प्रतीक होती है। गौरी का अर्थ है, जो ज्ञान प्रदान करती हैं, जीवन में गति लाने का काम करती हैं और मुक्त करती हैं।

मां सिद्धदात्री
मां दुर्गा का नौवां स्वरूप मां सिद्धदात्री हैं। यह देवी मां हमारे जीवन में चमत्कार प्रकट करती हैं, असंभव को भी संभव बना देती हैं। मां सिद्धदात्री हमें सीमाओं से परे सोचने, तार्किक दिमाग से परे जाने और स्थान की सीमाओं से परे देखने की अनुमित देती हैं। मां सिद्धदात्री हमारे प्रयासों का फल प्रदान करती हैं।
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