हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यमुना छठ का व्रत किया जा रहा है। इसको यमुना जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व यमुना नदी के पृथ्वी पर आगमन का प्रतीक है। हिंदू धर्म में यमुना को एक पवित्र नदी माना जाता है। इस बार यमुना छठ का पर्व 03 अप्रैल 2025 को मनाया जा रहा है। इस दिन यमुना नदी में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन यमुना नदी के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। यमुना छठ का व्रत करने से व्यक्ति को यम और शनि के भय से मुक्ति मिलती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको यमुना छठ की तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में बताने जा रहे हैं।
तिथि और मुहूर्त
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरूआत 02 अप्रैल 2025 की रात 11:49 मिनट पर हुई और इसका समापन 02 अप्रैल की रात 09:41 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 03 अप्रैल 2025 को यमुना छठ का व्रत किया जा रहा है।
हिंदू पंचांग के मुताबिक इस दिन स्नान के लिए सुबह 04:38 मिनट से 05:47 मिनट तक का समय शुभ माना गया है। इसके अलावा आप विजय, अभिजीत और गोधूलि मुहूर्त में भी स्नान-दान कर सकते हैं।
पूजा विधि
यमुना छठ के दिन सुबह जल्दी उठकर यमुना नदी में स्नान करें और फिर भगवान श्रीकृष्ण और यमुना नदी की पूजा करते हैं। पूजा में फल, फूल और मिठाई आदि अर्पित की जाती है। इस दिन यमुना अष्टक का पाठ करें और फिर आरती करें। इस दिन दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना जाता है। लोग यमुना छठ का व्रत करते हैं।
महत्व
विशेष रूप से यमुना छठ का पर्व उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में मनाया जाता है। यह पर्व मां यमुना नदी की पूजा के लिए समर्पित है। इस पर्व को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है। दरअसल, यमुना नदी का भगवान श्रीकृष्ण से गहरा संबंध है। श्रीकृष्ण ने यमुना नदी के तट पर कई लीलाएं की थीं। इसलिए इस दिन यमुना छठ के दिन भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि यमुना छठ पर यमुना नदी में स्नान करने से यम और शनि के भय से मुक्ति मिलती है। इससे आत्मा शुद्ध होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।