हिंदू धर्म में लक्ष्मी पंचमी के व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लक्ष्मी पंचमी का व्रत किया जाता है। चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि को लक्ष्मी पंचमी कहा जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन किया जाता है और व्रत किया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी का पूजन करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती है। तो आइए जानते हैं लक्ष्मी पंचमी का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और नियम के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
हिंदू पंचांग के मुताबिक 02 अप्रैल की रात 02:32 मिनट से चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरूआत होती है। वहीं 02 अप्रैल की रात 11:49 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 02 अप्रैल को लक्ष्मी पंचमी का व्रत किया जा रहा है।
लक्ष्मी पंचमी पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ कपड़े पहनें। फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। फिर पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराएं और मां लक्ष्मी को पुष्प, गंध, चंदन, फल, सुपारी, रोली और मोली आदि अर्पित करें। मां लक्ष्मी को मिठाई को भोग लगाएं और धूप-दीप जलाएं। पूजा के समय लक्ष्मी स्त्रोत का पाठ करें और मंत्रों का जाप करें। लक्ष्मी पंचमी कथा का पाठ करें। फिर पूजा के आखिरी में आरती करें।
लक्ष्मी पंचमी व्रत नियम
इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
लक्ष्मी पंचमी के दिन व्रत में दूध, फल और मिठाई का सेवन करना चाहिए।
मां लक्ष्मी को पीली कौड़ी चढ़ाएं।
इस दिन चांदी से संबंधित चीजों का दान नहीं करना चाहिए।
तेल का दान न करें।
लक्ष्मी पंचमी के व्रत में तामसिक भोजन और मांसाहार आदि करने से बचना चाहिए।